आष्टा जिला सीहोर मध्य प्रदेश से राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

आष्टा। भारतीय संस्कृति उन्नायक जन-जन के संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज का विगत दिनों छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ चंद्रगिरी पर समाधीपूर्वक देवलोक गमन हुआ था। अलीपुर चैराहा जनपद पंचायत के सामने विधायक गोपालसिंह इंजीनियर के मुख्य आतिथ्य में श्रद्धांजली कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री इंजीनियर ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज एक महान संत थे जिनका देवलोकगमन राष्ट्र की नही पूरे विश्व की क्षति है। उनका जन्म कर्नाटक प्रांत में 1946 में हुआ। संयम व त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उनकी प्रेरणा से कन्या शिक्षा हेतु प्रतिमा स्थली, हथकरघा केन्द्र, गौशालाएं संचालित है। देश के महान संत उनके द्वारा दीक्षित होकर आध्यात्मिक संदेश दे रहे है। उन्होंने ऐसे साहित्य का सृजन किया जिस पर आज शोध किए जा रहे है तथा देश की कई विश्वविद्यालयों में उनका अध्ययन कराया जा रहा है। आज की नई शिक्षा नीति में भारत सरकार ने उनका अभिमत स्वीकारा है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनकी प्रेरणाओं से अभिभूत है।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि रायसिंह मेवाड़ा ने श्रद्धांजली सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आचार्यश्री का जीवन जनकल्याण ही नही प्राणी मात्र के कल्याण के लिए समर्पित था। उनका जाना पूरे विश्व की क्षति है। ऐसे आध्यात्मिक संत का जीवन हमें सार्थक जीवन बनाने का संदेश देता है। संत के रूप में ऐसी विभूति का जन्म मानवता व राष्ट्र को गौरवान्वित करता है। उनका संपूर्ण जीवन एक संदेश होता है जिस पर चलकर हम मानव जीवन को सार्थक कर सकते है।

श्रद्धांजली सभा को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ललित नागौरी, जनपद उपाध्यक्ष गजराजसिंह पटेल, धर्मसिंह आर्य, मोनू सक्सेना, कोमल जैन, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष अतुल शर्मा, पार्षद कमलेश जैन, धनरूपमल जैन, जुगलकिशोर, सुरेन्द्र जैन, विमल जैन, डाॅ. सलीम खान, कैलाश, रमेश जैन, रवि पंडिया, राजेन्द्र केशव, रामचंद्र परमार, मनोहर वर्मा, राजू मीणा, सुमत जैन, कैलाश जैन, गणेश आदि मौजूद थे। संचालन सुरेन्द्र जैन शिक्षक द्वारा किया गया।

