रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा। माँ जैसा संतान को बनाना चाहे वैसा बना सकती है,दुनिया में सभी प्रकार के डे मनाए जाते हैं। लेकिन दीक्षा -डे का लाभ कुछ ही क्षेत्र को मिलता है । आष्टा बहुत ही सौभाग्यशाली नगर है जहां अनेक आचार्य भगवंतो सहित साधु -संतों व महासतियों के चरण पढ़े। आज हमारी गुरु मैय्या मालव रत्न एवं अनेक उपाधियों से विभूषित उपप्रवर्तनी मेवाड़ गौरव कीर्ति सुधा जी का 53 वां दीक्षा दिवस मनाया जा रहा है ,वह भी त्याग -तपस्या एवं गुणानुवाद सभा के माध्यम से।ऐसी बेटी जिसने जिन शासन का गौरव बढ़ाया वह सभी माताओं को मिले।52 साल दीक्षा के पूर्ण होने पर भी सेवा का विशिष्ट गुण आप में है।आप योगी, ज्ञानी और ध्यानी है।आप आंतरिक तप निरंतर करती रहती है। आहार के प्रति अशक्ति नहीं।

आप अपने निर्मल भविष्य के पथ पर बढ़ रही है।उक्त बातें श्री महावीर भगवान स्थानक में विराजित साध्वी आराधना श्रीजी ने अपनी गुरणी मैय्या मालव कीर्तिसुधा जी के 53 वें दीक्षा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही।साध्वी आराधना श्रीजी ने आशीष वचन देते हुए कहा कि आष्टा नगरी पर पूज्य गुरुदेवों ने पावन बनाया।गुरणी मैय्या का सानिध्य मिला। चिल्ड्रन डे, फादर्स डे, मित्रता डे सहित अनेक दिवस मनाया लेकिन आज दीक्षा दिवस मनाने का अवसर आष्टा को मिला। आपने कहा कि आज चौथी कन्या गर्भ में आ जाएं और सोनोग्राफी से पता चल जाएं तो उसे गर्भ में ही मार देते है। लेकिन ऐसी चौथी कन्या कनासिया में जन्मी जिन्होंने जैन शासन का गौरव बढ़ाया और आज पूरे देश में मालव कीर्तिसुधा जी के नाम से जानी -पहचानी जाती है। आचार्य अमोलक ऋषि का जन्म आष्टा में हुआ था और दीक्षा सिद्धिकगंज में हुई थी।मां जैसा चाहती है वैसी संतान को बनाती है।सास- ससुर, माता पिता बनने की इच्छा लेकिन महाराज की मां बनने की इच्छा के भाव बहुत कम के मन मे आते थे।

शिष्य को गुरु की चाह और गुरु को भी अच्छे शिष्य की चाहत रहती है।गुरणी मैय्या को स्वप्न आया ब्रह्म मुहूर्त में साधु के दर्शन हुए और सुबह उन्हें वहीं स्वप्न वाली महासती मिली। गुरुदेव से गुरणी मैय्या के पिता ने विनती करी कि आप हमारे कनासिया ग्राम में पधारेंगे तो में अपनी बेटी को आपको सौंपूंगा, अन्यथा वह वृद्ध हो जाएगी लेकिन अन्य जगह दीक्षा नहीं कराऊंगा। अपने गुरु की आपने बहुत सेवा की। कोई बेटा- बेटी भी इतनी सेवा नहीं करतें जो आपने अपनी गुरणी मैय्या की करी। आज भी आपके मन में सेवा के भाव है। 1995 में मालव कीर्ति पद से सुशोभित किया। जिनशासन प्रभाविका, उपप्रवर्तनी, मेवाड़ गौरव सहित अनेक विभूतियों से सम्मानित किया। चाहने से मौत नहीं होती।प्रमोद जैन शुजालपुर,श्रीमती रचना जैन शुजालपुर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष, स्थानकवासी श्राविका संघ अध्यक्ष श्रीमती साधना आनंद रांका, श्रीसंघ अध्यक्ष पवन सुराणा, पूर्व अध्यक्ष पारसमल सिंघवी, नगीनचंद जैन एडवोकेट, श्रावक संघ अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट तथा श्रीमती प्रतिभा विनय देशलहरा ने गुणानुवाद सभा में कहा कि कनासिया मक्सी की बेटी साध्वी मालव कीर्तिसुधा जी का आष्टा में सन 1976 में चातुर्मास हुआ एवं 25 वीं दीक्षा जयंती आष्टा में मनाई थी और 53 वीं दीक्षा जयंती का लाभ आष्टा को मिला।प्रभावना के लाभार्थी आनंद लाभमल रांका, सुरेश कुमार मांगीलाल रांका,पारसमल सुरेश कुमार सिंघवी, निर्मल कुमार अंकुर रांका रहे।श्रावक संघ द्वारा सामूहिक एकासना एवं बाहर से पधारे श्रद्धालुओं के भोजन का लाभ लिया।इस अवसर पर काफी संख्या में समाज जन उपस्थित थे।

