रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

तपस्चर्या साधु का गुण होती है । रत्नत्रय के साधक दिगम्बर साधुओं के लिए कठोर साधना आत्मा के अलंकार का कारण होती है । तन के प्रति निर्मोही और मन मे वात्सल्य लिए आत्म धन की प्राप्ति का पुरुषार्थ करने में लीन साधु संघ की हर चर्या में शास्त्रीय लालित्य और गुरु निर्देश के पालन की प्रतिबद्धता झलकती है ।
नगर में विराजित आचार्य विद्यासागरजी महाराज के संज्ञा उपदेशी संघ के चारो ही श्रमणों के सानिध्य में पुण्य लाभार्थी श्रावकों की धर्मानुभूति नवीनता का संचय कर रही है । परस्पर प्रेरक यह साधु संघ कठोर तपस्चर्या में आत्म परीक्षक के रोल में दिखाई देते हैं ।जैन धर्म मे पर्व निग्रह और संयम के प्रति उत्साह का कारण बनते हैं । चातुर्मास में साधु संघ का ठहराव श्रावकों के हित का कारण तो बनता ही है यह सांस्कृतिक मूल्यों और धर्म की मजबूती का कारण भी बन जाता है ।

