नगर पुरोहित पाठक परिवार द्वारा सभार
रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

देव प्रबोधिनी एकादशी, जिसे देवोत्थापिनी एकादशी भी कहा जाता है, का सनातन धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से उठते हैं, जो कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक की चार महीने की अवधि (चौमासा) के बाद होता है। चौमासा के दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, और देव प्रतिष्ठा, लेकिन देव उठनी एकादशी के बाद से ये सभी कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं।

इस वर्ष 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा, और इसी के साथ विवाह तथा अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होगी। इस अवसर पर तुलसी-सालगराम का विवाह भी आयोजित किया जाएगा, जो घरों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर संपन्न होगा।

यह दिन “अबूझ मुहूर्त” के रूप में भी मान्य है, इसलिए अनेक परिवारों ने विवाह आयोजन की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं, और बाजारों में इस अवसर के लिए सामग्री की खरीदारी भी जोरों पर है।

ज्योतिषाचार्य पं. डॉ. दीपेश पाठक के अनुसार, इस साल 12 नवंबर के बाद नवंबर में 11 विवाह के शुभ मुहूर्त हैं: 12, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 25, 27, 28, और 29। दिसंबर में विवाह के लिए 4, 5, 9, 10 और 14 तारीख को शुभ मुहूर्त हैं, जिसमें 14 दिसंबर को अंतिम मुहूर्त माना गया है।तुलसी विवाह और देवोत्थापन के लिए भी शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं।

पंडित मनीष पाठक के अनुसार, प्रात:कालीन मुहूर्त 9:23 से 10:46 और 10:44 से 01:26 तक लाभ-अमृत काल के रूप में हैं। प्रदोषकाल व वृषभ लग्न के लिए संध्या 5:29 से 7:33 का समय, तथा सायंकाल में 7:07 से 8:47 बजे तक लाभ बेला के रूप में शुभ मानी गई है।



