परम पूज्य आनंद ऋषि महाराज की 111वीं दीक्षा जयंती पर णमोकार महामंत्र जाप का आयोजन

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

परम पूज्य आनंद ऋषि महाराज कुछ 111 वीं दीक्षा जयंती पर जाप

आजसंसार का दुःख च्यूइंगम की तरह है,पाप करते हुए नहीं डरते हैं तो कर्म बांधने में कहा डरने वाले — पूज्य मल्या श्री

पूज्य सुनीता जी का 35 वां दीक्षा व अवतरण दिवस पर णमोकार महामंत्र का जाप किया ।

आष्टा।संसार में सुख नहीं दुःख ही दुःख है। व्यक्ति निरंतर कर्मों का बंध कर रहा है।उसी से दुःख आतें हैं अशुभ कर्म उदय में आने पर ‌सुख में फूला नहीं समाता है। दुःख में घबराता है। भगवान सुख दुःख नहीं देते हैं। कर्म बोलकर नहीं आता है।सुख चाहते हैं काम दुःख का करते हैं।संसार का दुःख च्यूइंगम की तरह है।पाप करते हुए नहीं डरते हैं तो कर्म बांधने में कहा डरने वाले। तीर्थंकर भगवान की रत्ती भर बराबरी नहीं कर सकते हैं,मनुष्य जन्म अनमोल है।क्षणिक सुख को गले लगा लिया, लेकिन अनमोल सुख पर ध्यान नहीं है।कर्मों से मुक्त होने का प्रयास नहीं किया है। उक्त बातें श्री महावीर भवन स्थानक में विराजित पूज्य मल्याश्री जी महाराज साहब ने आशीष वचन देते हुए कहीं। आपने कहा देवलोक, त्रियंच से भी अशरीर नहीं बन सकते हैं। सिर्फ मनुष्य भव से ही मोक्ष की प्राप्ति होगी। कर्मों से मुक्त होने के लिए धर्म आराधना जरूरी है। मल्याश्री जी ने कहा कर्म किसी को नहीं छोड़ते है। भगवान के कान में ग्वाले ने कीलें ठोंके तो भगवान ने कहा यह मेरे कर्मों का फल है। छः महीने तक कीलें कान में ठूके रहे।राग -द्वेष, तेरा -मेरा मत करो। कर्मों ने भगवान को भी नहीं छोड़ा। कर्मों से मुक्त होने के लिए धर्म करना पड़ेगा।आज के साधन दुःख का साधन है, वह कर्मों से मुक्त कराने वाला नहीं है। यह संसार छोड़ने योग्य है। कर्म दुःख देने वाले हैं। संसार में सुख होता तो परम पूज्य सुनीता जी महाराज साहब आज से 35 साल पहले दीक्षा क्यों लेती।आज आपका दीक्षा एवं जन्म दिवस है। पूज्य सुनीता श्री ने कहा जीव अपने जीवन में जहां रहता है वहां उसे सुंदर सजाने का काम कर रहा है ,जैसे घर में रहता है तो घर के आंगन को रंगोली से सजाता है। शादी में जाना है तो हाथों को मेहंदी से सजाता है।दीपावली पर दीवाल मिल पेंट से, चेहरे को मेकअप से लेकिन शरीर में जो आत्मा है उसको सजाने का काम कोई नहीं कर रहा है। इस आत्मा को संयम और तप से सजाना है ।गुणीजनों ने तप और संयम को धर्म का राजमार्ग बताया है ,आत्मा का श्रृंगार तप है। पूज्य सुनीता श्री ने कहा संसार में सुख नहीं है,लेकिन जीव संसार में सुख पाने के लिए निरंतर दौड़ लगा रहा है, क्योंकि कर्म कभी दुख देते हैं तो कभी सुख देते हैं ,व्यक्ति सुख में फूले नहीं समाता और दुख में रोता है। स्वयं के कर्म ही दुख देते हैं और स्वयं के कर्म ही सुख देते हैं ।जो कर्म बांधें है ,उन्हें भोगना पड़ेंगे। जैसे फल परिपक्व होने के बाद अपने आप टूट जाता है। इसी प्रकार कर्म का उदय आने पर दुख आता है। संसार का सुख चिंगम की तरह है कर्मों ने तो तीर्थंकरों को भी नहीं छोड़ा व्यक्ति संसार के क्षणिक सुख में लगा हुआ है उसे गले लगा लिया है यह अमूल्य जन्म मिला है कर्मों से मुक्त होने के लिए चिंता से मुक्त होने के लिए इन सभी का शॉर्टकट है समभाव रखना ।साधन सभी दुखदाई है भगवान की वाणी पर भरोसा करना है।

महसति परम पूज्य मधुबाला जी आदि छः ठाणा महावीर भवन स्थानक में विराजित हैं।

45 मिनट तक आज जाप होंगे 8 दिसंबर रविवार को सुबह 8:30 से 9:15 बजे तकपरम पूज्य आचार्य 1008 श्री आनंद ऋषि जी महाराज साहब की 111 वीं दीक्षा जयंती के उपलक्ष में महावीर भवन स्थानक में णमोकार महामंत्र का जाप का आयोजन किया है। सभी से जाप कार्यक्रम को सफल बना कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है। प्रवचन के पश्चात प्रश्न मंच भी हो रहा है। प्रभावना एवं प्रश्न मंच के पुरस्कार के लाभार्थी अशोक कुमार वीरेंद्र कुमार देशलहरा परिवार रहा। वहीं रविवार को हुकुमचंद राजेश कुमार राकेश कुमार सोनी परिवार लाभार्थी रहेंगे।

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