आज गुरुवार 26 जून से आरंभ होगा आषाढ़ माह का गुप्त नवरात्र, जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा 26 जून गुरुवार को आर्द्रा नक्षत्र व ध्रुव व सर्वार्थ सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र कलश स्थापना के साथ आरंभ होगा।

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

नगर पुरोहित मनीष पाठक,दीपेश पाठक की कलम से साभार

*आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा 26 जून गुरुवार को आर्द्रा नक्षत्र व ध्रुव व सर्वार्थ सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र कलश स्थापना के साथ आरंभ होगा। पांच जुलाई शनिवार को विजया दशमी तिथि के साथ नवरात्र का समापन होगा। नवरात्र के दिनो में श्रद्धालु विधि-विधान के साथ मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करेंगे।श्रद्धालु निराहार या फलाहार रह कर मां के जप, तप , पाठ व आराधना में लीन रहेंगे। नवरात्र के मौके पर घरों व देवी मंदिरों में अखंड दीप जलाकर श्रद्धालु मां की उपासना करेंगे। गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना की प्रधानता होती है।

*आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पीछे का इतिहास* नगर पुरोहित पं मनीष पाठक ने बताया कि प्राचीन वैदिक युग के दौरान, इस गुप्त नवरात्रि के बारे में केवल कुछ सिद्ध साधकों या ऋषियों को ही पता था। गुप्त नवरात्रि तांत्रिकों और साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है।ऐसा माना जाता है कि इस अवधि के दौरान देवी दुर्गा की साधना करने से सभी भौतिकवादी समस्याओं का अंत हो जाता है। इसलिए गुप्त नवरात्रि ज्यादातर तांत्रिक पूजा के लिए लोकप्रिय है। इस अवधि के दौरान, साधक ज्ञान, धन और सफलता के लिए देवी दुर्गा का आह्वान करते हैं।

*ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवरात्रि*

ज्योतिषाचार्य पं डॉ दीपेश पाठक ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल भर में कुल चार नवरात्रि आते हैं। जिसमें से दो चैत्र व शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। आषाढ़ मास में पड़ने वाले नवरात्रि को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धुम्रावती, मां बंगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।गुप्त नवरात्र में इन देवियों का विधि-विधान के साथ व्रत और साधना करने से रोग-शोक का नाश होता है।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि अवधि के दौरान, हिंदू भक्त देवी दुर्गा को उनके दिव्य आशीर्वाद का आह्वान करने के लिए समर्पित मंत्रों का जाप करते हैं। ‘दुर्गा सप्तशती’, ‘देवी महात्म्य’ और ‘श्रीमद्-देवी भागवत’ जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।हिंदू भक्त आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान ‘दुर्गा बत्तीसी’ या देवी शक्ति के 32 अलग-अलग नामों का भी जाप करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अभ्यास सभी समस्याओं को समाप्त करता है और भक्तों को जीवन में शांति प्राप्त करने में मदद करता है।

*घटस्थापना मुहूर्त:*

आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू: 25 जून 2025, शाम 4:00 बजेआषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि समाप्त: 26 जून 2025, दोपहर 1:24 बजेमिथुन लग्न में शुभ घटस्थापना समय: 26 जून 2025, सुबह 5:25 से सुबह 6:58 तकअभिजित मुहूर्त: सुबह 11:56 से दोपहर 12:52 तकयह मुहूर्त साधकों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

इस दौरान विधिपूर्वक घटस्थापना करके दुर्गा मां की उपासना आरंभ की जाती है। इस प्रक्रिया में नियम, संयम और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। *गुप्त नवरात्रि के लाभ* हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में यदि साधक नियमित समय पर गुप्त रूप से मां दुर्गा की पूजा करता है तो उसे अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं। इससे उसके जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्यता, और शत्रु बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। ग्रह दोष और जीवन की नकारात्मकता दूर होती है, और साधक मानसिक, शारीरिक व आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है।इस साधना का प्रभाव इतना प्रबल होता है कि यह जीवन की दिशा बदल सकती है।

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