✨ श्राद्ध पक्ष में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार के प्रवचन

📰 श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा का किया रसपान

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर

आष्टा। हमारे सनातन धर्म में मानव सेवा को ही माधव सेवा बताया गया है। प्राणी मात्र में भगवान के दर्शन करने की प्रेरणा देते हुए संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार ने कहा कि परोपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे— “परहित सरिस धर्म नहीं भाई”— का उल्लेख कर जीवन में हमेशा दूसरों का भला करने का संदेश दिया।संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार श्री राम मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

कथा में उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेते हैं। द्वापर युग में कंस के अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी ने गाय रूप में ब्रह्मा जी से गुहार लगाई, तब भगवान विष्णु ने वचन दिया कि वे अवतार लेकर कंस का वध करेंगे।भादो कृष्ण पक्ष अष्टमी की मध्य रात्रि मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहां भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाते ही पूरा कथा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।

श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगे और बधाई गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया।इससे पूर्व पूज्य गुरुदेव ने प्रह्लाद चरित्र, जड़ भरत की कथा, समुद्र मंथन, वामन अवतार तथा द्रौपदी चीर हरण का मार्मिक प्रसंग सुनाया। द्रौपदी प्रसंग सुनकर अनेक श्रद्धालु भावविभोर होकर अश्रुपूरित हो उठे।कार्यक्रम में नामदेव समाज आष्टा की ओर से संत श्री का स्वागत किया गया। इस अवसर पर कैलाश बगाना, मनीष डोंगरे, भागवत मेवाड़ा, कुमेंर सिंह भाटी, अशोक खत्री, कोरी साहब, रामप्रसाद लाइनमैन, बाबूलाल शर्मा, दिनेश डोंगरे, वेद प्रकाश पिपलोदिया, दीपक मेवाड़ा सहित बड़ी संख्या में नारी शक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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