नगर में माता की आराधना की धूम। नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है।

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

अपनी मंद हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से जाना जाता है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी।

नजर गंज चौराहे पर भजन गायक आशा वैष्णव गुजरात ने आदि रात तक समा बांधा,भक्त झूम उठे

नवरात्रि के चौथे दिन हरा रंग पहनना शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, मां कूष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय है। मां कूष्मांडा को भोग में मालपुआ अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां कूष्मांडा प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

पूजा मंत्र – ॐ कूष्माण्डायै नम: ध्यान मंत्र – वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥नवरात्रि के चौथे दिन हरा रंग पहनना शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, मां कूष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय है। मां कूष्मांडा को भोग में मालपुआ अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां कूष्मांडा प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं

और यह चौथा रूप है मां कुष्मांडा का. कुष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़ा यानी पेठा की बलि देना. मां कुष्मांडा की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि देवी पार्वती ने ऊर्जा और प्रकाश को संतुलित करने के लिए सूर्य के केंद्र में निवास किया था

समस्त आष्टा के धर्म प्रेमी भक्तो एवं माता बहनो को बड़े हर्ष सूचित किया जाता है नगर के सबसे प्राचीनतम शीतला माता मंदिर मे नवरात्रि के पावन पर्व पर महा आरती का आयोजन प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी उल्लास के साथ मनाया जाएगा आप समस्त माता ,बहनो ,भाइयो से निवेदन है कि अधिक से अधिक जनसंख्या पधारकर धर्म लाभ लीजिए। धन्यवाद

दिनांक 18/10/2023दिन बुधवार समय रात्रि 8 बजे निवेदक प्राचीन शीतला माता मंदिर समिति

Leave a Comment