आष्टा जिला सीहोर मध्य प्रदेश से राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

धनतेरस मनाने के पीछे की पौराणिक कथाशास्त्रों के मुताबिक, जब समुद्र मंथन हुआ था उस समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुआ थे। वो समय कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी। यही वजह है कि इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के रूप में जाना जाता है।

भगवान धन्वंतरि को विष्णु जी का अंश माना जाता है।मान्यता है कि धन्वंतरि देव संसार में चिकित्सा विज्ञान का प्रचार-प्रसार किया था। धनतेरस के दिन अच्छे स्वास्थ्य के लिए इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। धनतेरस दो शब्दों से मिलकर बना है पहला धन और दूसरा तेरस, जिसका अर्थ होता है धन का तेरह गुना। इसलिए धनतेरस के दिन सोना-चांदी और बर्तन की खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि 13 दीये हैं जिन्हें दिवाली और धनतेरस के दौरान अपने घर में जलाना चाहिए और अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए । यह भी माना जाता है कि 13 दीये नकारात्मक ऊर्जा और बुरी आत्माओं से रक्षा करते हैं। वे दयालुता और पवित्रता का भी प्रतीक हैं।

धनतेरस पर सोने या चांदी के सिक्के खरीदना शुभ होता है। इसके अलावा चांदी के बर्तन भी खरीदे जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों आशुतोष झा के अनुसार,धनतेरस के दिन

खरीदे जाने वाले गहने, सिक्कों, बर्तनों की भी दिवाली के दिन गणेश-लक्ष्मी पूजन के दौरान पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने धन की देवी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं


