नगर में शुरू हुई मालवा माटी के प्रसिद्ध संत गोविंद जाने की सात दिवसीय संगीतमयी राम कथा

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर मध्य प्रदेश

मालवी भाषा में अपनी अद्वितीय श्रेणी में कथा करने वाले मालवा के प्रसिद्ध संत है गोविंद जाने

https://youtu.be/dqwhMIDS16w?si=WBbpOqPuK5bvPK3U

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 1 जनवरी से 7 जनवरी के मध्य आष्टा नगर में होने वाली मालवा माटी के संत श्री गोविंद जाने की के मुखर बिंद से इस वर्ष श्री राम कथा सल्परारंभ हुई। जहां पर श्रद्धालु काफी संख्या में श्रवण करने के लिए पहुंचे वही इस वर्ष महादेव महिला मंडल का इस वर्ष विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है वही लगभग 15 दिनों से गोविंद जाने सेवा समिति पंडाल और अन्य व्यवस्थाओं में जुटी हुई थी ।

इस वर्ष भी पहले ही दिन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु ओं का जमावड़ा श्रवण के लिए पहुंचा इस वर्ष गुरुदेव ने श्री राम मंदिर अयोध्या के प्राण प्रतिष्ठा के लिए श्री राम कथा पर विशेष प्रकाश डाला एल श्री संत ने कहा कि यह भारत भूमि है यहां पर दुष्टों और अत्याचारों की परीक्षा नहीं होती यहां सत्कर्म और संतों की परीक्षा होती है जिनके ईमान चरित्र प्रार्थना और गुरु बलवान होता है एक दिन किसी ने किसी रूप में उनसे मिलने स्वयं भगवान आते हैं

,जिस घर का मालिक रात्रि में जाग रहा होता है उसके घर में कभी चोरी नहीं हो सकती इस प्रकार हमारे मन के चरित्र को अगर हम रघुनाथ मन से जागृत कर लेंगे तो हमारे शरीर में कभी भी दुष्कर्म, दुर्गुण रूपी विचार, कभी नहीं आ सकेगा,ध्यान रखना कभी भी गुरु और माता-पिता धोखा नहीं देते हैं अगर यह धोखा देते हैं तो मनुष्य का समझो विनाश करीब है, हमारी पहली पाठशाला हमारी मां की गोद से शुरू होती है वहां से हमको सहज संस्कार और मनोबल मिलता है जिसके संघर्ष पर हम अपना जीवन जीते हैं और जीवन को सफल बनाते हैं

एक राम अवधेस कुमारा। तिन्ह कर चरित बिदित संसारा॥नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा। भयउ रोषु रन रावनु मारा॥अर्थात एक राम तो अवध नरेश दशरथ के कुमार हैं, उनका चरित्र सारा संसार जानता है। उन्होंने स्त्री के विरह में अपार दुःख उठाया और क्रोध आने पर युद्ध में रावण को मार डाला।राम कथा युगो युगो से चलती आई है और युगों युगों तक चलती रहेगी यह तो राम के चरित्र की ज्ञान रूपी गंगा है जिसको चित्र चरित्र करने से मनुष्य का जीवन सुधर जाता है कभी-कभी हमारे परिवार की किसी व्यक्ति की वाणी भी गुरु का काम करती है जिस प्रकार मंदोदरी के बार-बार रावण को समझाया कि जिनके नाम से पत्थर पानी पर तैर जाते हैं उनसे टकराने में आपको फायदा नहीं है, जेब भले ही धन से खाली हो हृदय में उत्तम चरित्र विचार संस्कार की जेब कभी खाली नहीं होनी चाहिए, हमेशा जिंदा व्यक्ति ही प्रार्थना करता है और हमारी प्रार्थना के शब्द अगर जनहित कल्याण के शब्द हो तो निश्चित ही तुलसीदास की तरह हमारे शब्द की समर्थता हर घर में शांति ला सकती है।

इस अवसर पर ,गोविंद जाने में समिति के डॉ मनोज नागर, नानूराम मेवाडा, विजय खंडेलवाल,चेतन सिंह ठाकुर,चेतन वर्मा ,बंटी मेवाड़ा ,राजा मेवाड़ा , मीडिया प्रभारी जुगल पटेल, जटाल सिंह मेवाडा , धिरप पटेल, सौभाल सिंह मुलगी ,बलबहादुर भगत जी, जितेंद्र सिरोठिया,शिवनारायण महादेव महिला मंडल की भगवती सोनी ,संध्या बजाज,मंजू राठौर ,विनीता महेश्वरी, सेज वाला शर्मा ,टीना पांचाल बिंदू सोनी मोजूद रहे।

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