मीठा अधिक खाने से बीमारियां बढ़ रही हैं — भूतबलि सागर महाराज पर्याय बदलती है आत्मा नहीं — मुनि सागर महाराज

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर मध्य प्रदेश

राग – द्वेष दूर करने का प्रयास करें। फिर आपका वाद -विवाद नहीं होगा। न्याय शास्त्र का अध्ययन करने से ज्ञान बढ़ेगा। न्यायालय आपके विवाद – झगड़ें का निराकरण वकील के माध्यम से करते हैं। व्यक्ति में अनेक गुण होते हैं। तन,मन के साथ कर्मों से मुक्त हो। सभी को मीठा – मीठा ही भाता है, कड़वा, खट्टा नहीं।इसी लिए बीमारी बढ़ रही है। संसार की जटिलता समाप्त नहीं हो रही है। पर्याय बदलती है, आत्मा नहीं।सत्य का नाश नहीं होता, असत्य का नाश होता है। समुद्र की लहरें उठती है, समुद्र वही रहता है। उक्त बातें नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर विराजित पूज्य गुरुदेव मुनि भूतबलि सागर महाराज एवं मुनि सागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहीं। मुनिश्री ने कहा शरीर नित्य भी है और अनित्य भी है।शरीर में राग -द्वेष है,वह अनित्य है।इस राग द्वेष को छोड़ने का प्रयास करें, वीतरागी बने।

पर्याय बदल रही है, द्रव्य बदल रहे हैं।तत्व को समझें, बहुत कुछ समझ में आ जाएगा। पर्याय देखते हैं और उसमें रम जाते हैं। मुनि सागर महाराज ने कहा समुद्र को देखते हैं तो आनंद ही आनंद आता है। मिट्टी ही घट का रुप लेती है। द्रव्य निमित्त है। मिथ्यादृष्टि का कभी भी राग – द्वेष दूर नहीं होता है।आज जितने भी झगड़े हो रहे ,वह कानून का ज्ञान नहीं होने के कारण।कर्नाटक में अभी भी गुरुकुल पद्धति है। आगे बढ़ कर धर्म आराधना करें,तेरह व बीस पंथी नहीं बने, प्रभु व गुरु के आराधक बने। आचार्य विद्यासागर महाराज स्वयंभू स्तोत्र को दिन में तीन बार पढ़ते थे। इसका बहुत महत्व है।

Leave a Comment