जिनवाणी मां को रजत पालकी में विराजित कर निकाली शोभायात्रा

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

ध्वजारोहण ओर शास्त्र स्थापना के साथ शुरू हुआ दस दिवसीय मुनिश्री भूतबलि सागर शिक्षण एवं संस्कार शिविर

पहले आत्म कल्याण का माहौल बनता था और आज दूर होते जा रहे –बाल ब्रह्मचारी संजय भैय्या

आष्टा ।नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर शुक्रवार 14 जून को प्रातः काल की बेला में नगर के प्रमुख मार्गों से मुनिश्री भूतबलि सागर शिक्षण एवं संस्कार शिविर में भाग लेने वाले सैकड़ों की संख्या में शिविरार्थियों ने जिनवाणी प्रभावना शोभायात्रा मां जिनवाणी को रजत पालकी में विराजित कर बाल ब्रह्मचारी संजय भैय्या पठारी के पावन सनिध्य में निकाली गई ।जो किला मंदिर पहुंचकर समापन हुई। शिविर की जानकारी समाज के नरेन्द्र गंगवाल ने देते हुए बताया कि तत्पश्चात शिक्षण शिविर का विधिवत शुभारम्भ मंदिर परिसर में ध्वजारोहण एवं शास्त्र स्थापना के साथ किया गया। पहले आत्म कल्याण का माहौल बनता था बाल ब्रह्मचारी संजय भैय्या पठारी वाले ने शिविर के शुभारंभ अवसर पर कहा कि बिना भोजन के जीवन नहीं चलेगा, लेकिन अधिक भोजन करना घातक हो जाता है। सभी चीजों की मर्यादा होती है।इसी प्रकार डॉक्टर के बताए अनुसार दवाई लेने से व्यक्ति ठीक हो जाता है, लेकिन अधिक दवाई अर्थात आठ दिन की दवाई एक ही दिन में लेने पर घातक हो सकती है। पहले आत्म कल्याण का माहौल बनता था और आज आत्म कल्याण से विमुख हो रहे हैं।

कोरोना चायना ने फैलाया बाल ब्रह्मचारी संजय भैय्या पठारी ने बताया कि अपने देश में कोरोना चायना से फैला था। चमगादड़ के सेवन से वहां चायना में कोरोना फैला था।चायना मेंअहिंसक धर्म विकृत हो गया।आज हम बच्चों के कैसे संस्कार दे रहे हैं। पहले आत्म कल्याण का माहौल बनता था और आज आत्म कल्याण से दूर हो गए हैं। जैनों के कौन से काम है।हम ध्यान देकर अपने विचार समझें। अपनी गलत मानसिकता को बदलना होगा। पहले चांदी की करेंसी थी और आज कागज की संजय भैय्या ने कहा स्वाध्याय करना बहुत जरूरी है। स्वाध्याय परम्परा विलुप्त होती जा रही है।धर्म को पैसे से नहीं जोड़ना चाहिए। पहले चांदी की करेंसी थी,आज कागज की करेंसी चल रही है। पहले सोच अच्छी थी, लेकिन आज सोच संकीर्ण हो गई है। व्यक्ति आज पैसा कमाने में लगा है, धर्म आराधना करने का समय नहीं है। आचार्य श्री ने कहा था जिनवाणी का प्रचार जरूरी संजय भैय्या ने कहा आचार्य श्री ने कुंडलपुर में हमसे कहा था कि जिनवाणी का प्रचार प्रसार बहुत जरूरी है। बहुत मनोयोग से धर्म का कार्य करना चाहिए।बिना स्वाध्याय के जीवन परिवर्तन नहीं होने वाला है। धर्म के साथ लौकिक शिक्षा को भी महत्व देवे। जैन धर्म का ज्ञानार्जन करें।ज्ञान सुख का कारण है, ज्ञान का बहुत महत्व है।

यह रहे लाभार्थी जिनवाणी शास्त्र स्थापना का सौभाग्य महेंद्र कुमार, राकेश कुमार, संतोष कुमार जैन जादूगर परिवार को मिला ।वही ध्वजारोहण का सौभाग्य निर्मल कुमार संदीप,संजय, शरद कुमार जैन बिंदिया परिवार बुधवारा को प्राप्त हुआ।इस अवसर पर काफी संख्या में समाज जन उपस्थित थे।

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