स्वयं का विवेक जाग्रत किये बिना कल्याण असम्भव। संजय भैया जी

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा– उक्त आशय के उद्गार श्री नेमिनाथ जिन मंदिर में चल रहे धर्म सभा के दौरान ब्रम्हचारी संजय भैया ने व्यक्त किये ।

उन्होंने बताया कि प्रथमानुयोग पड़ने से धर्म के प्रति श्रद्धा बनती है छोटे छोटे दृश्टान्त से हम धर्म के प्रति लो लगा सकते है संसारी जीव समझ नही पाता कि हमारा वैभव कितना है हमारे अंदर भी कितनी शक्ति विद्यमान है जिसके पास स्वयं का अंदर का ज्ञान नही है उनके लिए शास्त्र भी कुछ करने वाले नही है स्वयं का विवेक जाग्रत किये बिना कल्याण असम्भव है चाहे कितने भी शास्त्र पढ लो, बिना विवेक बुद्धि के कुछ भी नही होता अन्यथा एस शास्त्र को प्रतिदिन अर्घ्य चढ़ाने से कुछ नही होगा जब तक हम उन्हें विवेक पूर्वक अध्ययन नही करते ज्ञान का फल क्या है ज्ञान का फल हित की प्राप्ति ओर अहित का परिहार जिससे होता हो वही सच्चे ज्ञान का फल है।

क्षहढाला में आत्मा का हित बहुत अच्छे से बताया गया है आकुलता मोक्ष में नही है हमे मोक्ष मार्ग में ही लगे रहना चाहिए जीव का पूर्ण रूप से स्व हित मे लग जाना है हम प्रतिदिन मन्दिर आते है पूजा पाठ अज्ञानी प्राणी आर्त ध्यान में निरन्तर लगा रहता है वे मुड़ जीव कहलाते है वे इस लोक में ओर परलोक में अपने हित को प्राप्त नही कर पाते है तत्वार्थ सूत्र ग्रन्थ में बताया गया है कि धर्म ध्यान और शुक्ल ध्यान मोक्ष में कारण है ओर शुरू के दो ध्यान आर्त ध्यान और रौद्र ध्यान संसार के कारण है जिसकी बुद्धि और ध्यान अच्छा होगा वह इन दोनों ध्यान से बचने का प्रयास करते है जो जीव शांति से जीवन यापन कर रहा है धर्म ध्यान में लगा रहता है।

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