19 अगस्त को भद्रोपरांत मनाये रक्षाबंधन पर्व

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

नगर पुरोहित परिवार,आष्टा की कलम से

भाई-बहन के पर्व पर इस बार भद्रा का साया रहेगा, इसलिए यह रक्षाबंधन पर्व 19 अगस्त को दोपहर 01.35 बजे के बाद मनाया जाएगा। बहनें दिन में दोपहर के बाद भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

पूर्णिमा तिथि 18 तारीख की रात 03:07 मिनिट से प्रारंभ होगी जो 19 अगस्त की रात्रि 11:57 पर समाप्त होगी इस बीच भद्रा 18 अगस्त की रात को 03:07 मिनिट से प्रारंभ होकर 19 अगस्त दोपहर 01:34 मिनिट तक रहेगी,इस कारण दोपहर भद्रा के समापन पश्चात ही रक्षासूत्र भाई बहनों से बंधवा सकते है।

*रक्षाबंधन 2023 राखी बांधने का शुभ मुहूर्त’*

नगरपुरोहित पं मनीष पाठक के अनुसार भद्रा लगने के कारण इस बार रक्षाबंधन के त्योहार पर रक्षासूत्र किस शुभ समय पर बांधा जाएं ऐसे में लोगों में इसके शुभ मुहूर्त को लेकर असमंजस में है। बता दें कि राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर में 02 बजकर 17 मिनट के शुरू होगा जो रात्रि 08 बजकर 20 मिनट रहेगा। प्रदोषकाल मुहूर्तसंध्या 06:57 से रात्रि 09:10 मिनिट तक रहेगा इन शुभ मुहूर्त में आप अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

*राखी पर कब लग रहा है भद्रा काल’*

ज्योतिषाचार्य पं डा दीपेश पाठक ने बताया की सावन माह की पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही भद्रा शुरू हो जाएगा। यानी 18 अगस्त की रात्रि 03:07 मिनट से भद्रा शुरू होगी और 19अगस्त की दोपहर में 01:34 मिनट पर खत्म होगी। ऐसे में जो लोग राखी बांधना चाहते हैं वह इस दिन 18अगस्त की रात्रि भद्रोपरांत रात 03:07 मिनट से 19अगस्त की दोपहर 01.34 तक के बाद शुभ समय में रक्षा बंधन पर्व को मनाएं लोकाचार परंपरा में रक्षाबंधन पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी तक बनाया जाता इसलिए प्रथम राखी पूर्णिमा तिथि काल में बांधकर मनाना चाहिए उसके बाद आप अपनी सुविधा अनुसार जन्माष्टमी तक पर्व मना सकते है।

*भद्रा का साया क्या हैं*

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य की बेटी भद्रा को बहुत ही अशुभ माना जाता हैं इस लिए जब तक रक्षाबंधन में भद्रा का साया रहता हैं. तब तक रक्षाबंधन मनाना अशुभ माना जाता हैं. इसके पीछे की एक कहानी बहुत प्रसिद्ध हैं. कहा जाता हैं की रावण की बहन शुर्पनका ने रावण को भद्रा काल में राखी बांधी जिसका परिणाम यह हुवा की रावण का विनाश हों गया।

*इन बातो का रखे ध्यान*

1.रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें। राहुकाल या भद्राकाल में भूलकर भी भाई को राखी न बांधें।

2. प्रथम रक्षासूत्र अपने इष्ट देवता कुल देवता को बांधे

3. रक्षा सूत्र बनते समय ध्यान दे की भाई का मुख दक्षिण दिशा में न हो।

4. भाई को तिलक चंदन से करें वह अखंड अक्षत को लगाएं अर्थात अक्षत खंडित ना हो।

5.काले धागे की, टूटी-फूटी या खंडित राखी अपने भाई को न बांधें।

6.राखी बांधने समय रक्षाबंधन मंत्र या इष्टदेव मंत्र बोलना न भूलें। 7.भाई की आरती करते समय टूटा-फूटा दीपक न लें। बहन के आरती करने के पश्चात भाई थाली में दक्षिणा दिए बगैर अपनी जगह से ना उठे।

8. भाई को राखी बांधते समय सिर ढंकना न भूलें। ध्यान रहे कि भाई और बहन दोनों का सिर ढंका हुआ हो।

नगर पुरोहित परिवार,आष्टा 9893382678

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