आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज एवं नवाचार्य समय सागर महाराज का अवतरण दिवस शरद पूर्णिमा पर मनाया जाएगा —मुनिश्री निष्कंप सागर महाराज

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा।जो व्यक्ति भगवान के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है वह धन्यवाद का पात्र बन जाता है।84 लाख योनियों में भटकने के पश्चात मनुष्य गति और जैन कुल, जैन धर्म प्राप्त होना बहुत ही महत्वपूर्ण है। जैन होने का गर्व होना चाहिए। जैन होना आनंद का विषय है,यह आनंद नहीं आ रहा तो नाम के जैन हो। पंचपरमेष्टि का सानिध्य प्राप्त होना दुर्लभ है। धर्म सभा में शामिल होना चाहिए, जिनेंद्र भगवान की वाणी श्रवण कराते हैं मुनिराज।जो ज्ञान परम्परा से प्राप्त हुआ वह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। जिनेंद्र भगवान की वाणी ध्यान पूर्वक सुनना चाहिए,कब कौन सी वाणी से आत्म कल्याण हो जाएं। धर्म की मर्यादा रखें। हिंसात्मक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

उक्त बातें नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य गुरुदेव मुनिश्री निष्कंप सागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहीं। मुनिश्री ने कहा कि प्रभु का स्मरण व भक्ति जैन नहीं होकर भी कर रहा है वह व्यक्ति भी धन्यवाद का पात्र है। पहले भूले भटके जैन साधुओं के दर्शन होते थे, लेकिन आज आसानी से जैन साधुओं के दर्शन हो जाते हैं। मंदिर में भगवान के दर्शन और जैन साधुओं के दर्शन करने से मन में अच्छे परिणाम आना चाहिए । भगवान मौन रहते हैं,उनकी मुद्रा हमारे लिए कल्याणकारी है।भाव पूर्वक द्रव्य के साथ भगवान की पूजा-अर्चना व आराधना करना चाहिए। मुनिश्री निष्कंप सागर महाराज ने कहा कि सम्यकदृष्टि जीव स्वयं को दोष देता है और मिथ्या दृष्टि जीव दूसरे को दोष देता है। आपके जीवन में कष्ट, विपत्ति आने पर स्वयं को दोष देवें। जिनेंद्र भगवान की वाणी सुनी होती तो कष्ट, विपत्ति आती ही नहीं। संसार रूपी सागर में डूब रहे हो, जिनेंद्र भगवान के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है। सृष्टि ने सभी को बनाया। कर्मों के आधीन सृष्टि है। विपत्ति स्वयं के कर्म से आती है। जिनेंद्र भगवान के दर्शन से कर्म कटते हैं। भगवान के दर्शन से स्वर आपके निकले की अदभुत प्रतिमा है तो आपके मन में विशुद्धि बढ़ रही है।जो कर्म किए हैं उन्हें भोगना पड़ता है।संघ के विस्तार करने पर भी आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज सारा श्रेय अपने गुरु आचार्य ज्ञानसागर महाराज को देते थे। मुनिश्री ने कहा शरद पूर्णिमा के दिन आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज का अवतरण दिवस और नवाचार्य समय सागर महाराज का भी अवतरण दिवस है। समाज के लिए गौरव की बात है।पूरी दुनिया दोनों आचार्यो के अवतरण दिवस मनाएंगे। साधु का जन्म दिवस दीक्षा दिवस वाला रहता है। तीन दिवसीय आचार्य छत्तीसी विधान सहित अनेक आयोजन समाज द्वारा आयोजित किया है।

गुरुदेव की एक- एक शिक्षा हमारे कल्याण की रही। आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज में मैं और अहम कभी नहीं आया।दो कान धर्म की बातें सुनने को मिले हैं।जिनको कान से नहीं सुन सकते उन्होंने धर्म की बातें नहीं सुनी थी। पंचेंद्रिय इंद्रियों में शक्ति है और त्याग किया तो वहीं त्याग का परिणाम मिलता है। आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज का चित्र अनावरण किया खातेगांव से पधारे सेठी परिवार के निरीश सेठी , मनीष सेठी आदि ने परिवार सहित बड़े बाबा आदिनाथ भगवान,संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज एवं नवाचार्य समय सागर महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्जवलित कर मुनिश्री निष्कंप सागर महाराज का पाग प्रक्षालन किया।

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