डिप्टी कमिश्नर सोनाली जैन एवं जिला कमांडेंट सुमत जैन ने मुनि संघ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया, मंडला के प्रथम जिला न्यायाधीश दीपक चौधरी भी निष्कंप सागर महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचे

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा। भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष निर्वाण दिवस एवं पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व के पहले डिप्टी कमिश्नर श्रीमती सोनाली जैन, जिला कमांडेंट श्री सुमत जैन एवं मंडला के प्रथम जिला न्यायाधीश श्री दीपक चौधरी नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य गुरुदेव मुनिश्री 108 निष्कंप सागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 निष्काम सागर जी महाराज के दर्शन लाभ हेतु पधारे।

डिप्टी कमिश्नर श्रीमती सोनाली जैन एवं डिस्टिक कमांडेंड श्री सुमत जैन ने मुनि संघ का आष्टा चातुर्मास के दौरान आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनिश्री 108 निष्कंप सागर जी महाराज के दर्शन लाभ लेने आष्टा चातुर्मास के दौरान दर्शन लाभ लेने पहुंचे श्रावक श्रेष्ठी मुनिश्री के गृहस्थ जीवन के चचेरे भाई जिला प्रथम न्यायाधीश मंडला श्री दीपक चौधरी भी अपने परिवार सहित दर्शन लाभ कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

तत्त्वार्थसूत्र पढ़ें, सभी ज्ञान हो जाएगा — मुनिश्री निष्काम सागर महाराज मुनिश्री निष्काम सागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहा कि तत्त्वार्थसूत्र पढ़ लो तो सारा ज्ञान हो जाएगा। पुण्य और पाप की व्याख्या करते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा पुण्य की तरफ से ध्यान हटाकर पाप की ओर ध्यान ले जाएं, तभी पाप को समझोगे व अनुभव होगा और पाप करना छोड़ दोगे।

अहिंसा मय वातावरण रहता है तो जनता का मन मस्तिष्क भी अच्छा रहता है।वैभव का घमंड नहीं करें। अपने अंदर की कषायों को निकाल कर फेंक देवें।आचार्यो ने कहा है कि अगर दीक्षा नहीं ले पा रहे हैं तो घर में रहकर व्रती बने। मुनिश्री ने कहा आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज की बहुत ही बारिक दृष्टि थी। दस प्रतिमाधारी व्यक्ति को अपने व्रतों का पालन करने के साथ ही स्वयं के काम शरीर साथ दे रहा है तो स्वयं ही करना चाहिए। अपनी दृष्टि और दृष्टिकोण अच्छा रखें। अगर आप अपना काम कर सकते हैं तो अन्य से काम नहीं कराएं ।

भगवान के सामने जितना भव्य द्रव्य चढ़ाते हैं, उतना ही व्यक्ति का वैभव बढ़ता है। अहिंसा और करुणा दान का बहुत महत्व है। करुणा भाव हमेशा रखें।जैन आगम में करुणा भाव का बहुत महत्व है। आतिशबाजी चलाने से काफी जीवों की हिंसा होती है।आप धन के पीछे भाग रहे हैं लेकिन भगवान महावीर स्वामी ने धन, वैभव छोड़ कर मोक्ष कल्याणक अर्थात मोक्ष रुपी रत्न प्राप्त किया। भगवान की भक्ति में मन लगाकर वैभव प्राप्त करें और अपनी आत्मा का उत्थान करें।

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