रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

वृंदावन कॉलोनी, आष्टा में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के छठे दिन का प्रसंग अत्यंत भव्य और आनंदमय रहा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का आयोजन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।पंडित श्री दीपक जी शर्मा ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि जब हम भगवान की शरण में जाते हैं, तो हमें सच्चा आनंद प्राप्त होता है। सांसारिक सुख अल्पकालिक होते हैं, लेकिन परमात्मा की कृपा से मिला आनंद अटल और शाश्वत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि परमात्मा, महात्मा, और माता—इन तीनों की सेवा से ही वास्तविक आनंद प्राप्त होता है, और हमें यह प्रयास करना चाहिए कि ये तीनों कभी भी हमसे अप्रसन्न न हों।

गुरुदेव ने मानव जीवन की दुर्लभता पर जोर देते हुए रामायण के इस प्रसंग का उल्लेख किया— “बड़े भाग्य मानुष तन पावा।” कथा का सार यह था कि शरीर का पति सांसारिक हो सकता है, लेकिन आत्मा का पति केवल परमात्मा ही है। इसलिए, मनुष्य को कभी भी भगवान को भूलना नहीं चाहिए और सदैव उनके प्रति भक्ति-भाव बनाए रखना चाहिए।

कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का यह पावन प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा और भक्ति का एक अनुपम उदाहरण बना। आयोजन की पवित्रता और उल्लास ने सभी उपस्थित भक्तों को आनंद और भक्ति से भर दिया।

