हाईकोर्ट ने दहेज प्रताडना के मामले में ननद एवं दामाद के विरूद्ध दर्ज एफआईआर को किया रद्द

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा:- दहेज प्रताडना के एक मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने फरियादिनी द्वारा ननदो एवं दामाद के विरूद्ध दर्ज दहेज प्रताडना की एफआईआर को रद्द करते हुए उनके विरूद्ध विचारण को बंद करने के आदेश दिए हैं।

माननीय उच्च न्यायालय इंदौर में श्रीमति मुकीला बी. आदि द्वारा दायर अपील में फरियादी की ननद मुकीला बी., शफीका बी. शकीला बी. एवं ननदोईं मुमताज खाॅ के विरूद्व दर्ज दहेज प्रताडना एवं मारपीट के आरोपो को निराधार मानते हुए फरियादिनी श्रीमति नुरीन बी. पत्नि जावेद खाॅ की ओर से शुजालपुर थाने में दर्ज कराई गई धारा 498-ए, 323, 294, 506, 190 भारतीय दंड विधान की प्रथम सूचना रिपोर्ट को निरस्त करते हुए अधीनस्थ न्यायालय को आदेशित किया हैं कि याचिकाकर्तांगण के विरूद्ध प्रचलित कार्यवाही को बंद करते हुए उनके संबंध में विचारण समाप्त किया जावे।

प्रकरण का संक्षिप्त विवरण यह हैं कि

फरियादिनी नुरीन बी. निवासी भीमपुरा शुजालपुर का निकाह दिनांक 5.11.2017 को शेखपुरा अलीपुर आष्टा निवासी जावेद खां पिता अब्दुल लतीफ खां के साथ हुआ था। उनसेे दो संताने हुई। इसके बाद पति पत्नि के बीच बच्चो की परवरिश एवं बार बार मायके जाने की बात को लेकर दिनांक 27.12.2023 को मामूली विवाद हुआ, जिसे फरियादिनी नुरीन बी. एवं उसके परिजनो ने तूल देते हुए पति जावेद खाॅ, उसके बहने मुकीला, शफीका, शकीला बी एवं दादाम मुमताज खां निवासी सीहोर के विरूद्ध पुलिस थाना शुजालपुर में अपराध क्रं. 333/2023 धारा 498-ए, 323, 294, 506, 190 भारतीय दंड विधान का दर्ज करा दिया।

जिसका विचारण शुजालपुर न्यायालय में चल रहा था। ननदे मुकीला, शफीका, शकीला एवं दामाद मुमताज खाॅ ने इस एफआईआर को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय इंदौर के जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी ने धारा 498-ए की धारा के दुरूपयोग पर गंभीर टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्तांओ के विरूद्ध दर्ज एफआईआर को दिनांक 9.12.2024 को निरस्त करने के आदेश पारित किए हैं।

याचिकाकर्तांओ के वकील सुरेन्द्र सिंह परमार ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिककर्ताओं के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट में सामान्य आक्षेप लगाये हैं, जिनके आधार पर उनके विरूद्ध अभियोजन कार्यवाही को निरंतर नही रखा जा सकता। पति एवं पत्नि के मध्य बच्चो को लेकर विवाद हैं। जिसे लेकर पूरे परिवार को लिप्त नही किया जाना चाहिए। यह विधि के प्रावधानो का दुरूपयोग हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न न्याय दृष्टांतो का उल्लेख करते हुए एफआईआर को निरस्त किया हैं।

*विधिक अभिमत*

याचिकाकर्ता के वकील सुरेन्द्र परमार ने विधिक अभिमत देते हुए कहा कि इस प्रकार के निर्णय से पत्नि एवं उनके परिजनो द्वारा ससुराल पक्ष के सभी सदस्यो को दहेज प्रताडना के मामलो में लिप्त करा दिया जाता हैं, उस पर लगाम लगेगी। उन्होने कहा कि पति अपने विधिक अधिकारो के प्रति सचेत रहे हैं तथा जब भी पत्नि द्वारा ससुराल पक्ष के सभी सदस्यो के विरूद्ध झूठी रिपोर्ट करें तो उस रिपोर्ट को तत्काल हाईकोर्ट में चुनौती दे।

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