रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा। झूलेलाल सिंधी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं, जिन्हें ‘इष्ट देव’ कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरुण (जल देवता) का अवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज पूजता है। सिंधी समाज का विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है।

सिंधी समाज में ज्योत और जल का महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान झूलेलाल की जयंती को चेटीचंड के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व सिंधी समाज का प्रमुख त्योहार है, जो रविवार, 30 मार्च को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा।—इस दिन की खास बातें:चेटीचंड, हिन्दू चंद्र नववर्ष का पहला दिन होता है।इस दिन को समुद्र पूजा के रूप में भी मनाया जाता है।विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।लंगर प्रसादी का वितरण किया जाता है।सिंधी समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

चेटीचंड पर्व का महत्व:यह पर्व सत्य, अहिंसा, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है।यह समाज में एकता और विश्वास को प्रबल करता है।यह पर्व सिंधी समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता है।सिंधी समाज इस पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ झूलेलाल जी की आराधना कर पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएगा।
दिनांक 30 मार्च। 2025 रविवार को शोभा यात्रा प्रातः 9:00 बजे नगर के मुख्य मार्गो से होकर वापस गुरुद्वारे पहुंचेगा।

