मां के चरणों में जन्मदिन समर्पित कर स्व. पिता की याद में भावुक हुए मनीष डोंगरे, दिग्विजय सिंह से भी लिया आशीर्वाद

सुबह सबसे पहले अपनी माताजी के चरणों में आशीर्वाद लेकर उन्होंने खुद को धन्य माना

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

सकल हिंदू समाज के प्रमुख एवं नामदेव समाज के अध्यक्ष मनीष डोंगरे ने अपने जन्मदिन को इस बार एक विशेष रूप में मनाया। सुबह सबसे पहले अपनी माताजी के चरणों में आशीर्वाद लेकर उन्होंने खुद को धन्य माना और इस खास दिन को अपनी माता को समर्पित कर भावुक क्षणों को साझा किया।

सुबह से ही सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं का तांता लगा रहा। मित्रों, समाजजनों एवं संगठन के पदाधिकारियों ने बढ़-चढ़कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। अपने जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता माननीय दिग्विजय सिंह जी से भी आशीर्वाद लिया।इस पूरे अवसर ने यह साबित कर दिया कि संस्कार और सामाजिक समर्पण ही किसी नेता की सच्ची पहचान होते हैं।

मनीष डोंगरे का जन्मदिन उत्साह, आशीर्वाद और सामाजिक समर्पण के बीच हुआ भव्य रूप से संपन्ननामदेव समाज के अध्यक्ष एवं सकल हिंदू समाज के प्रमुख मनीष डोंगरे का जन्मदिन इस बार सामाजिक सौहार्द और आत्मीयता के भावों के बीच अत्यंत विशेष बन गया।

उन्होंने दिन की शुरुआत अपनी माताजी के आशीर्वाद से की, जिसे उन्होंने अपना संपूर्ण जन्मदिन समर्पित किया।इसके पश्चात भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जी से उन्होंने मुलाकात की, जो अरनिया जोहरी में चंदर सिंह ठाकुर के यहां एक विवाह समारोह में सम्मिलित होने पधारे थे।

यहीं पर दिग्विजय सिंह जी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और 500 रुपये भेंट स्वरूप देकर आशीर्वाद प्रदान किया।दिनभर मित्रों, शुभचिंतकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर जन्मदिन समारोह आयोजित किए गए:अनूप जैन कचरू मित्र मंडल ने गुरु कृपा भोजनालय पर जन्मदिन मनाया।नारायण मुकाती भुरू ने की बावड़ी पर उन्हें आमंत्रित कर आत्मीयता से जन्मदिन मनाया।ओल्ड यंग मैन बीपी ग्रुप ने शीतल स्वीट्स पर हर्षोल्लास से यह अवसर मनाया।सकल हिंदू समाज ने मनीष डोंगरे के निवास स्थान पर बड़े धूमधाम से जन्मदिन मनाया।इस आयोजन में कई गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिनमें अनिल श्रीवास्तव, राजीव गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार , मुकेश बैरागी, निर्मल बैरागी, मनोहर बैरागी और मांगीलाल सिसोदिया प्रमुख रहे।इस पूरे दिन को मनीष डोंगरे ने सामाजिक समर्पण, आत्मीयता और भारतीय परंपराओं के अनुरूप मनाया, जिसने उनके व्यक्तित्व की गरिमा को और भी ऊंचा किया।

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