भागवत भास्कर संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार ने बताया – “परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं”

श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की हुई दिव्य प्रस्तुति

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

जरूरी नहीं कि हर समय मुख पर परमात्मा का नाम लिया जाए, वह समय भी भक्ति का ही होता है जब एक इंसान दूसरे इंसान के काम आता है।

परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है, जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी लिखा है – “परहित सरिस धर्म नहीं भाई।” उक्त प्रेरक विचार भागवत भास्कर संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा भीलखेड़ी बरामद में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से व्यक्त किए गए।

कथा के दौरान पूज्य गुरुदेव ने कहा कि यदि किसी का भला नहीं कर सकते तो कम से कम किसी का बुरा भी न करें। “अमृत फल चाख्यों नहीं, फिर विष फल काहे खाय।” यह जीवन को दिशा देने वाले विचार हैं।

कथा में आगे पूज्य संतश्री ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा अत्यंत भावपूर्ण शैली में सुनाई। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार, और पाप की अधिकता हो जाती है, तब भगवान स्वयं मनुष्य रूप में अवतार लेते हैं ताकि साधु-संतों, भागवत भक्तों, गौमाता और नारियों की रक्षा हो सके।
“जब-जब होइ धर्म के हानि।
बाढ़े असुर अधम अभिमानी।
तब-तब धरि प्रभु विविध शरीरा।
हरहु सदा सज्जन भव पीरा।”

द्वापर युग में जब कंस के अत्याचारों से धरती त्रस्त हो गई, तब पृथ्वी गौ का रूप लेकर ब्रह्माजी के पास गईं। ब्रह्माजी समस्त देवताओं सहित क्षीरसागर तट पर भगवान विष्णु से प्रार्थना करने पहुंचे। भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे शीघ्र ही ब्रजमंडल (मथुरा) में जन्म लेंगे और कंस सहित समस्त दुष्टों का विनाश करेंगे। इस संकल्प के अनुरूप भगवान ने वसुदेव-देवकी के यहां श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, बुधवार की मध्यरात्रि को मथुरा के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।

जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म की कथा कथा मंच पर पहुंची, संपूर्ण पांडाल “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। पुष्प वर्षा के साथ श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे, बधाई गीत गाए गए, और जन्मोत्सव का उल्लास सम्पूर्ण वातावरण में व्याप्त हो गया।

इससे पूर्व कथा के दौरान संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार ने भगवान के परम भक्त प्रहलाद जी का चरित्र, जड़ भरत की कथा, समुद्र मंथन एवं वामन अवतार जैसे प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर सभी श्रोता भावविभोर हो उठे।

इस आध्यात्मिक अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से राजेंद्र सिंह ठाकुर, राम भरोसे जाट, गणेश जाट, जसपाल ठाकुर, अके सिंह ठाकुर, घीसूलाल भगत, विजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, बाबा साहब बरडघाटी, बहादुर सिंह ठाकुर, मनोहर सिंह पटेल, कल्याण सिंह ठाकुर, अमन बैरागी, लखन लाल शर्मा, चंद्रपाल व्यास, जीवन सिंह, प्रहलाद सिंह, अनार सिंह, मानसिंह ठाकुर सहित बड़ी संख्या में नारी शक्तियां भी उपस्थित रहीं।

पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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