रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

सेवदा (आष्टा)।ग्राम सेवदा के श्री दुर्गा मंदिर प्रांगण में आज से श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा का आयोजन धार्मिक आस्था, लोककल्याण और आत्मकल्याण की भावना से किया जा रहा है। प्रथम दिन कथा स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया, जहाँ भक्तों की भारी भीड़ श्रद्धा के साथ उपस्थित रही

कथा प्रवचन में पंडित अग्निहोत्री बंधु भागवत आचार्य ने कहा कि भागवत कथा वेदों का सार और मोक्ष का द्वार है। इसके श्रवण मात्र से पितरों का उद्धार होता है और व्यक्ति को एक लाख गायों का दान, दस हजार यज्ञ, और सोने के पहाड़ के दान जितना पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि सात दिन तक भागवत कथा का श्रवण करने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थ सहज रूप से प्राप्त होते हैं।कथा के प्रथम दिवस में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की कथा का वर्णन हुआ। विशेष रूप से आत्मदेव ब्राह्मण की कथा सुनाई गई, जिसमें दिखाया गया कि कैसे भक्ति और वैराग्य के माध्यम से जीवन में संतुलन और शांति पाई जा सकती है।आचार्य ने कहा कि जहाँ भागवत कथा होती है, वहाँ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण साक्षात उपस्थित होते हैं, और कथा स्थल पर स्वर्ग से देवता एवं समस्त तीर्थों का आगमन होता है। यही भागवत महापुराण की महान महिमा है।कथा के अगले भाग में राजा परीक्षित की कथा आई, जिनको एक संत के अपमान के कारण सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला। इस प्रसंग के माध्यम से यह सिखाया गया कि संतों का अपमान करने वालों को भगवान भी क्षमा नहीं करते।

अंततः राजा परीक्षित ने सुखदेव जी के चरणों में शरण लेकर भागवत कथा का श्रवण किया, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।कथा के अवसर पर भक्तगणों में विशेष उत्साह देखा गया और पूरा वातावरण “हरे कृष्ण, हरे राम” की ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। कथा का आयोजन सप्ताह भर तक चलेगा और प्रतिदिन कथा के पूर्व भजन संध्या एवं संकीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा।

