रायसिंह मेवाड़ा मित्र मंडल ने किया श्वेतांबर जैन समाज के वरघोड़े का बहुमान
रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा। श्वेतांबर जैन पर्यूषण का समापन संवत्सरी महापर्व के साथ होता है, जिसे जैन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। आज समाजजनों द्वारा किला स्थित गिरनार तीर्थ से सिद्धीतप के तपस्वियों का वरघोड़ा प्रारंभ किया जो बड़ा बाजार, सिकंदर बाजार, गंल मंदिर, सुभाष चौक, दादावाड़ी होता हुआ मानस भवन पहुंचा जहां तपस्वियों का बहुमान, पारणा, स्वामीवात्सल्य, सामूहिक क्षमापना के साथ संपन्न हुआ।

पर्यूषण महापर्व, जैन धर्म का वह पवित्र स्तंभ है, जो हर वर्ष अपने अनुयायियों को आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान की ओर प्रेरित करता है। यह केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि आत्म-निरीक्षण, तपस्या और क्षमा का एक गहन अभियान है, जिसका उद्देश्य आत्मा को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर उसे अपनी वास्तविक प्रकृति के करीब लाना है।

सिद्धीतप के तपस्वियों का वरघोड़ा दादावाड़ी से कॉलोनी चौराहा पहुंचा, जहां नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा द्वारा वरघोड़ा में शामिल जैन मुनियों, सिद्धीतप की कठीन तपस्या करने वाले श्रद्धालुओं, समाज के वरिष्ठजनों का बहुमान किया। इस अवसवर पर नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने वरघोड़ा में शामिल जैन समाज के लोगों को मिच्छामी दुक्कड़म कहते हुए क्षमायाचना की और सभी तपस्वियों को तपस्या पूर्ण करने पर शुभकामनाएं दी। श्री मेवाड़ा ने कहा कि आज पर्यूषण पर्व का समापन है, जिसे पर्वों का राजा कहा जाता है। आप सभी के लिए यह आत्म-शुद्धि, आत्म-नियंत्रण और आत्मा के कल्याण का महापर्व है।

इन आठ दिनों की साधना ये आप सभी को इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सिखाया है और धर्मग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से ज्ञान का प्रकाश फैलाया है। मैं कामना करता हूं कि हम सभी पर्यूषण पर्व से प्राप्त ऊर्जा को अपने जीवन में धारण करें और अहिंसा, मैत्री तथा करुणा का पालन करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाएं। आप सभी को क्षमावाणी की हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर मोहनबाबू शर्मा, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि सोनू गुणवान, व्यापार महासंघ अध्यक्ष रूपेश राठौर, पार्षद रवि शर्मा, तेजसिंह राठौर, तारा कटारिया, सुभाष नामदेव, हिउस अध्यक्ष कालू भट्ट, यश छाजेड़, आनंद गोस्वामी, कैलाश शर्मा, दिनेश पाटीदार आदि मौजूद थे।
