जी एस टी में बदलाव सरकार का देर से उठाया सही कदम है। पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर

केंद्र सरकार ने अदूरदर्शी तरीके से दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भारी जी एस टी लगा कर व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं की कमर ही तोड़ दी थी। भारत के नवनिर्माण के नाम पर अनुभव विहीन तरीके से कर आरोपित कर वसूली की। देश के प्रमुख विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस कार्यवाही को गब्बर सिंह टैक्स की संज्ञा दी थी और जरूरी उपभोक्ता वस्तुओ पर भारी भरकम दरों का विरोध किया था।

वर्तमान की राजनीतिक स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए जी एस टी काउंसिल ने दरों को कम कर दो स्लैब 5% और 18%, 22 सितम्बर से लागू करने की सहमति बनाई है जबकि पहले चार स्लैब थे और अधिकतम दर 28% थी। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष तथा पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने जी एस टी की दरों में कमी को उचित बताया हैं। कैलाश परमार ने आरोप लगाया हैं कि केंद्र सरकार की ढुलमुल विदेश नीति और जनविरोधी आर्थिक नीतियों के चलते लगातार स्थिति बिगड़ रही है।

केंद्र सरकार को चाहिए कि वह अपनी यथास्थिति वादी पिछड़ी और पूर्वाग्रह से ग्रसित मानसिकता से निकल कर वैश्विक आर्थिक नीति का अनुपालन करे और देश वासियों के हित मे भारत के सामाजिक ढांचे और ताने बाने के अनुरूप ही वित्त नीतियां लागू करें।

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