रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

बड़ा बाजार के पंडित राम भरोसे शर्मा ने हमारे प्रतिनिधि को बताया की नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। 17 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।

नगर में सब्जी मंडी दुर्गा उत्सव समिति बड़ा बाजार की प्रतिमा दर्शन

अन्नपूर्णा माता मंदिर दर्शन
माता रानी के मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान हैं, इस वजह से मां का नाम चंद्रघंटा पड़ा।माना जाता है कि माथे पर चंद्रमा को धारण करने वाली मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से व्यक्ति हमेशा संकटों से बचा रहता है।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के समक्ष एक छोटे लाल वस्त्र में लौंग, पान, सुपारी रखकर मां के चरणों में चढ़ाएं और देवी के नवार्ण मंत्र का 108 बार जाप करें. मां चंद्रघंटा के बीज मंत्र का जाप भी कर सकते हैं.

अगले दिन ये लाल पोटली सुरक्षित स्थान पर रख दें.नवरात्र के तीसरे दिन दुर्गाजी के तीसरे रूप चंद्रघंटा देवी के वंदन, पूजन और स्तवन करने का विधान है। इन देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चंद्रमा विराजमान है इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।
नगर में अलीपुर चौराहा दुर्गा माता मंदिर प्रतिमा दर्शन



अलीपुर रेस्ट हाउस के सामने मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा
इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला और वाहन सिंह है।अब मां चंद्रघंटा को जल अर्पित करने के बाद सफेद कमल, लाल फूल और पीले गुलाब के फूल या माला चढ़ाएं। इसके बाद सिंदूर, अक्षत, गंध, धूप आदि चढ़ाएं।

मां को दूध से बनी चीज का भोग लगाएं। इसके बाद घी का दीपक और धूप चलाकर दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, मंत्र आदि का जाप कर लें।


