रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर मध्य प्रदेश

हर साल अहोई अष्टमी पूरे देश में बहुत ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाई जाती है। यह त्यौहार विशेष रूप से परिवार की विवाहित महिलाएं मनाती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए अहोई माता से प्रार्थना करती हैं।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और तारों की छाव में व्रत का पारण करती हैं. अहोई अष्टमी व्रत, एक मां का अपने पुत्र के प्रति प्रेम को दर्शाता है.अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों के साथ के जल ग्रहण करती हैं और व्रत का पारण करती है. इस व्रत का बहुत महत्व हैं. माना जाता है माताएं अपने बच्चों को कष्टों और दुख दर्द से दूर रखने के लिए और उनकी रक्षा के लिए ये व्रत रखती हैं.वैसे तो ज्योतिष की मानें तो आपको अहोई अष्टमी के दिन दूध और दूध से बना सामान न खाने की सलाह दी जाती है। यही नहीं इस फल और अनाज भी नहीं खाना चाहिए। इस दिन शाम के समय आप पूजा करके भोजन ग्रहण कर सकती हैं। अहोई अष्टमी के दिन तारे निकलने के बाद ही तारे को अर्घ्य दिया जाता है और पूजन करने के पश्चात अन्न जल ग्रहण किया जाता है
अहोई अष्टमी व्रत की कथा





