रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

किसी दिन या तिथि का सम्बन्ध यदि महापुरुषों के जन्म और उनकी लीलाओं से हो तो उसका महत्व स्वमेव ही अमृत तुल्य हो जाता है ।

शरद पूर्णिमा पर जन्मे महापुरुषों के अनुयायियों के लिये यह दिन आस्था और दोगुने उत्साह का पर्व बन जाता है । शरद पूर्णिमा कुशवाह समाज के आराध्य भगवान लव कुश , महर्षि वाल्मीकि , स्वर्णकार समाज के महाराजाधिराज अजमीढ़जी और जैनाचार्य विद्यासागर जी तथा उनके उत्तरवर्ती आचार्य समयसागरजी महाराज का भी अवतरण दिवस है । इस दिन का सम्वन्ध भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रास लीला से भी है । हमारे पुराणों में यह वर्णन है कि शरद पूर्णिमा का चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और इसकी उज्ज्वल चांदनी में औषधीय गुण भी होते हैं ।

यह प्रशन्नता की बात है कि हमारे उत्सव प्रिय नगर में इन महापुरुषों के प्रति आस्थावान जैन समाज , स्वर्णकार समाज और कुशवाह समाज के साथ ही वाल्मीकि समाज भी अनेक सांस्कृतिक आयोजनों के साथ यह त्योहार उत्साह और श्रद्धा पूर्वक मनाते हैं । मैं सभी समाजजनों और नागरिकों की आस्था का अनुमोदन करते हुए शरद पूर्णिमा की बधाई देता हू । यह उद्गार पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने कुशवाह , स्वर्णकार और जैन समाज द्वारा नगर में बारी – बारी से निकाले गए चल समारोह का स्वागत करते हुए कही । कैलाश परमार ने कहा कि शरद पूर्णिमा का त्यौहार हमारी सनातन एकता को मजबूत करता है । इस दिन गायत्री शक्ति पीठ सहित नगर के प्राचीन मंदिरों में अमृत औषधीय युक्त खीर का प्रसादी वितरण भी हमारी मान्य परम्पराओं और श्रद्धा को दर्शाता है । कैलाश परमार मित्रमंडल ने भगवान श्री लव कुश जी , महाराजाधिराज अजमीढ़ जी तथा आचार्य विद्यासागर जी के चित्र पर माल्यार्पण और पूजा अर्चना की तथा सभी समाजों के पदाधिकारियों महिला और युवा मंडलो का साफा पुष्पमाला और पट्टिकाओं से स्वागत किया । इस अवसर पर प्रदीप प्रगति महासचिव प्रभु प्रेमी संघ ,अजीत कुमार जैन पूर्व अध्यक्ष केमिस्ट एसोशिएशन ,पल्लव प्रगति अध्यक्ष जनरल स्टोर एसोशिएशन , राज परमार , जसवीर सिंह परमार, सतीश मालवीय आदि सक्रिय रूप से मौजूद थे ।


