रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

दीपावली या दिवाली, भारत का एक प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है, जिसे हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

दीपों से सजी इस रात का इंतजार भारत में हर किसी को रहता है, क्योंकि यह केवल एक त्योहार नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए उमंग, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम है।दीपावली का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्वदीपावली का इतिहास कई धार्मिक कथाओं और मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। हिंदू धर्म के अनुसार, इस दिन भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण, रावण का वध कर और 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर नगर को सजाया।

वहीं, जैन धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मानते हैं। सिख धर्म में, दीपावली को छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की रिहाई के दिन के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली के पांच दिन 1. धनतेरस: इस दिन को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लोग नए बर्तन, आभूषण, और वाहन खरीदते हैं और धन के देवता कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं।

2. नरक चतुर्दशी या रूप चौदस: इसे नरकासुर का वध दिवस माना जाता है। इस दिन लोग स्नान कर अपने शरीर को सुगंधित करके पूजन करते हैं और अपनी सुंदरता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते हैं।

3. दीपावली: यह मुख्य दिन होता है जब लोग अपने घरों और मंदिरों में दीये जलाते हैं। लक्ष्मी पूजा के द्वारा सुख, समृद्धि और शांति की कामना की जाती है। रंगोली से घरों को सजाया जाता है और मिठाई बांटी जाती है।
4. गोवर्धन पूजा: इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाने की कथा से प्रेरणा लेकर गोवर्धन पर्वत और गोवर्धन महाराज की पूजा की जाती है।

5. भाई दूज: यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं।

दीपावली का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व दीपावली का पर्व सामाजिकता और एकता का संदेश भी देता है। इस दिन लोग अपने मित्रों, परिवारजनों और पड़ोसियों के साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं, और आतिशबाजी की जाती है, जो वातावरण में उत्साह भर देती है।

साथ ही, यह समय होता है पुराने झगड़ों और गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से रिश्तों की शुरुआत करने का।दीपावली और पर्यावरण संरक्षण हालांकि, आज के समय में दीपावली का स्वरूप थोड़ा बदल गया है। अत्यधिक पटाखों के प्रयोग से वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए, अब लोग “ग्रीन दीपावली” का संदेश फैलाने लगे हैं, जहाँ पटाखों का कम से कम उपयोग किया जाता है, और दीये जलाकर परंपरागत तरीके से इस त्योहार को मनाने की कोशिश की जाती है।

निष्कर्ष। दीपावली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में प्रकाश, आशा, प्रेम और भाईचारे का संचार करने वाला पर्व है। यह हमें सिखाता है कि अंधकार चाहे जितना भी घना हो, एक छोटा-सा दीपक भी उसे दूर करने में सक्षम है। समाज में प्रेम, शांति और सहयोग की भावना को बनाए रखने के लिए हमें इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाना चाहिए और इसे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ संयोजित करके मनाने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।


