धन की नहीं, धर्म की वसीयत दें: मुनिश्री निष्कंप सागर महाराज। अहिंसा का प्रभाव असीम है: मुनिश्री निष्काम सागर महाराज

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आष्टा:मुनिश्री निष्कंप सागर महाराज ने कहा कि समाज को धन के बजाय धर्म की वसीयत देने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर में आयोजित एक विशेष बैठक को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया। मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति को अपने धर्म, कुल और राष्ट्र की गरिमा बनाए रखने के लिए जीवन के आदर्श सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

मुख्य बातें:

सामूहिक रात्रि भोजन पर रोक:

मुनिश्री ने समाज से सामूहिक रात्रि भोजन बंद करने का आग्रह किया।जैन कुल की प्रतिष्ठा बनाए रखने की अपील: उन्होंने कहा कि जैन कुल में जन्म लेना गर्व की बात है, और हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे यह कुल बदनाम हो।

मोबाइल के दुष्प्रभाव:

मुनिश्री ने मोबाइल के उपयोग पर चिंता जताई, इसे परिवार में दूरियां बढ़ाने वाला और महिलाओं के लिए “दूसरी सौत” करार दिया।

महिलाओं की भूमिका:

उन्होंने कहा कि बहू-बेटियों को धर्म से जुड़ना चाहिए और जिनेंद्र भगवान के दर्शन करते समय सिर पर चुनरी रखना चाहिए।सख्त निर्णयों की जरूरत: गलत कदम उठाने वाले युवाओं और अन्य धर्म में विवाह करने वालों पर सख्त सामाजिक निर्णय लेने का सुझाव दिया।

अहिंसा की महिमा पर विचार:

मुनिश्री निष्काम सागर महाराज ने अहिंसा के अद्वितीय प्रभाव का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान महावीर के समय शेर और गाय एक साथ जलपान कर रहे थे। उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज के एक प्रसंग का जिक्र किया, जिसमें एक विक्षिप्त ऊंट ने आचार्य को देखकर शांतिपूर्वक नतमस्तक हो गया।

समाज के लिए निर्णय:समाज की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

जैसे:

1. विवाह और अन्य कार्यक्रमों में रात्रि भोज न कराया जाए।

2. शादी-विवाह के दौरान महिलाओं और बेटियों के नृत्य पर प्रतिबंध।

3. चक्रवर्ती विवाह में पंचायत का सहयोग सुनिश्चित करना।

4. विवाह के दौरान धोती-दुपट्टे पहनने का प्रावधान।

बैठक में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया और इन निर्णयों का करतल ध्वनि से समर्थन किया।

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