आष्टा पुलिस ने अंधे हत्याकांड से उठाया पर्दा, आरोपी ने चाकू से की निर्मम हत्या, शव बोरी में भरकर कुएं में फेंका
रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

दिनांक 20.05.2025 को थाना आष्टा को सूचना मिली कि ग्राम भवरा के पास खेत में स्थित कुएं में एक अज्ञात व्यक्ति की लाश तैर रही है। सूचना पर आष्टा और इछावर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची, जहां बाल मुकुंद परमार के कुएं में बोरी में भरा एक शव विकृत अवस्था में मिला।

मृतक की कमर में रस्सी से बंधा हुआ बड़ा पत्थर भी मिला।ग्रामीण दीपक कोरकु द्वारा मृतक की पहचान बृजलाल कोरकु, पिता बलराम कोरकु, उम्र 22 वर्ष, निवासी हरसपुर (इछावर) के रूप में की गई। शव की स्थिति अत्यंत क्षत-विक्षत थी। उसे पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल भेजा गया।
प्रथम दृष्टया मामला हत्या और साक्ष्य छुपाने का प्रतीत होने पर अज्ञात आरोपी के विरुद्ध थाना आष्टा में अपराध क्रमांक 253/25, धारा 103(1)/238 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।पुलिस जांच और खुलासा:पुलिस अधीक्षक सीहोर श्री दीपक कुमार शुक्ला, अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमती सुनीता रावत, अनु. वि. अधिकारी श्री आकाश अमलकर और थाना प्रभारी आष्टा निरीक्षक गिरीश दुबे के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित की गईं।जांच के दौरान मृतक के परिजनों और ग्रामीणों से गहन पूछताछ की गई।

साथ ही मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर घटना से जुड़ी जानकारी एकत्र की गई। इसी दौरान एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा कि मृतक बृजलाल का ग्राम कुडीखाल निवासी एक युवती से प्रेम प्रसंग था। घटना से कुछ दिन पूर्व मृतक और उस युवती के पिता लखन कोरकु के बीच विवाद हुआ था।लखन कोरकु को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उसने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि मृतक बृजलाल उसकी बेटी से विवाह के लिए बार-बार दबाव बना रहा था, जबकि वह यह विवाह नहीं चाहता था। इस कारण क्रोधित होकर दिनांक 14.05.2025 को लखन ने बृजलाल पर चाकू से हमला किया और उसकी हत्या कर दी। शव को रस्सियों से बांधकर बोरी में भरकर मोटरसाइकिल से भवरा के एक कुएं में फेंक दिया।

सबूत और कार्यवाही:पुलिस ने आरोपी के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त चाकू और मोटरसाइकिल जब्त की है। आरोपी के विरुद्ध आगे की वैधानिक कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पुलिस टीम का सराहनीय योगदान:निरीक्षक गिरीश दुबे (थाना प्रभारी, आष्टा)उपनिरीक्षक: अविनाश भोपले, चन्द्र शेखर डिगा, अनिल डोडियारसहायक उपनिरीक्षक: रमेश चंद माझीप्रधान आरक्षक: मुकेश शर्मा (335), पव्व वाडिवा (401), देवेन्द्र तिवारी (105), अशोक यादव (616), शैलेन्द्र सिंह राजपूत (258 – साइबर सेल)आरक्षक: शिवराज चंद्रवंशी (230), जीतेंद्र चंद्रवंशी (126), चेतन चौहान (823), अमन जाटव (526), संजय मालवीय (744), विनोद परमार (785), हरिभजन मेवाड़ा (421), राजेश परमार (392), धीरज मंडलोई (368), सोमपाल (433), जितेन्द्र परमार (479)महिला आरक्षक: हंसा परमार (201), रजनी (733)इन सभी का योगदान इस जघन्य हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में अत्यंत सराहनीय रहा।
