रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

आज गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा आष्टा।मनुष्य पर्याय और जैन कुल प्राप्त कर जब धर्म ध्यान कर रहे हैं यह बहुत विशेष पुण्योदय है । तीनों पुरुषार्थ विशेष है।मनुष्य पर्याय में जिनवाणी सुन रहे हैं,जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक दर्शन कर रहे, गुरु के दर्शन कर रहे यह सामान्य नहीं है। जिनके जीवन में धर्म है वह महान है।पुण्य के कारण पुरुषार्थ किया। व्यक्ति को सात पीढ़ी की चिंता है, वर्तमान पीढ़ी की नहीं। कौन सा स्वप्न देखते हो,जिसे मुनिश्री स्वप्न में आएं वह बहुत ही पुण्यशाली है। इन्द्रियों के दास बने हुए हो,जो इन्द्रियों का दास है वह संयम धारण नहीं कर सकते हैं। मुनि किसी से राग-द्वेष नहीं करते हैं। मां में ममता छुपी हुई है। भगवान के सामने प्रतिज्ञा करें कि कभी भी आत्मघात नहीं करेंगे। पहले स्वयं को सुधारें, फिर दूसरे को।

वरमाला से आत्मकल्याण नहीं होगा, आत्म कल्याण तो पिच्छिका- कमंडल से होगा।उक्त बातें नगर के श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर अरिहंत पुरम अलीपुर में वाककेशरी श्रमणाचार्य विनिश्चय सागर मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री प्रवर सागर मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। आपने कहां कि सफेद बाल यमदूत के दूत हैं वह संयम के मार्ग पर अग्रसर होकर आत्म कल्याण करने का संदेश देते हैं। मुनिश्री ने कहा शरीर का श्रृंगार नहीं करने वाले व्रती एवं महाव्रती है।

वैसे आजकल तो ब्यूटीपार्लर का जमाना है। आत्म कल्याण की उम्र है, मृत्यु का कोई भरोसा नहीं।आर्य परम्परा समाप्त हो रही है। तपस्या करने से आत्म कल्याण होगा।पाश्चात्य संस्कृति हावी हो रहीं हैं।जैसा भेष वैसे भाव होते हैं।भेष का बहुत प्रभाव पढ़ता है। संयोग के बाद वियोग आता है, यह प्रकृति का नियम है।धन साथ जाने वाला नहीं, किया गया पुण्य ही साथ जाएगा, अधर्मी डूबता है। मिथ्यात्व को त्याग कर आगे बढ़ना है। सम्यक दर्शन वाले भव से पार हो जाते हैं।कुगुरु को नमस्कार कर रहे हो, धर्म का पुरुषार्थ करें, जिनवाणी श्रवण कर धर्म पुरुषार्थ करें।धन के संग्रह करने में नहीं थकते, नोट गिनने की मशीन लें आएं, लेकिन धर्म करने में थक जाते हो, धर्म करते -करते देह त्यागे।देव पर्याय से कम लोग आ रहे हैं। मनुष्य पर्याय को सार्थक करें, धर्म पुरुषार्थ करें। मुनिश्री प्रवर सागर मुनिराज ने कहां भगवान,गुरु और शास्त्र अर्थात देव, शास्त्र और गुरु पर विश्वास नहीं है तो परिवार पर आपको विश्वास नहीं होगा।

तलाक का जमाना चल रहा है,तलाक का कारण शक की दृष्टि से देखना हैं।राग को समाप्त करें। जहां धर्म वहां पुरुषार्थ और भक्ति होती है। ज्ञान चेतना में अनन्त सुख है। अष्टांहिका महापर्व पर मंदिरों में नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान एवं श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की पूजा अर्चना श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही है। गुरु पूर्णिमा पर मुनिश्री प्रवर सागर मुनिराज को समर्पित , अनिरुद्ध से प्रवर सागर बने डॉ श्रेयांश कुमार जैन -उषा जैन के घर बंधा जी अतिशय क्षेत्र टीकमगढ म.प्र में 13 सितंबर 1980 को जन्में बालक का नाम माता -पिता ने अनिरुद्ध रखा। आपसे छोटा भाई अक्षय और बहन श्रद्धा है।इन दोनों की शादी हो गई।

आपने श्रमणाचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी मुनिराज से 5 दिसंबर 2012 को स्थान शिवाड़ सवाई माधवपुर राजस्थान में दीक्षा ली।वर्तमान में भगवान महावीर स्वामी की वाणी जन-जन तक पहुंचाने और त्याग, तपस्या और संयम के मार्ग पर चलकर आत्म कल्याण की प्रेरणा देने वाले मुनिश्री 108 प्रवर सागर मुनिराज चातुर्मास हेतु अरिहंत पुरम अलीपुर के श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं।
