श्रीजगदीश्वर धाम में जन्माष्टमी पर ‘श्रीकुरूविंद’ पोशाक पहनकर दर्शन देंगे श्रीराधाकृष्ण, मनमोहक छवि देखेंगे भक्त*

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां नगर के सभी मंदिरों में अंतिम स्तर पर चल रही है।श्रीराधाकृष्ण की पोशाके भी तैयार हो चुकी है।

रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर एमपी

*श्रीजगदीश्वर धाम स्थित देव भवन में विराजमान श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार इस बार जन्माष्टमी पर ‘श्रीकुरुविंद’ पोशाक धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। इस दिव्य पोशाक का निर्माण सिल्क, जरी, रेशम,रत्न,मोती आदि सामग्रियों से किया गया है।

श्रीकुरुविंद पोशाक में ठाकुरजी को ‘रक्तश्वेत’ दृश्य क्षेत्र के बीच विराजमान किया जाएगा।श्रीजगदीश्वर धाम व्यवस्थापक नगरपुरोहित पं मयूर पाठक ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्ममहोत्सव शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 16 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा। हमारे यह वर्षों से यह परंपरा हैं कि जन्माष्टमी के पर्व के पूर्व श्रावण एकादशी भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न संस्कार प्रारंभ होकर सवा माह तक संपन्न होते हैं। एकादशी पर से विभिन्न धार्मिक संस्कार प्रारंभ हो चुके है।इस खास अवसर पर श्रीजगदीश्वर धाम की साज-सज्जा, श्रीराधा कृष्ण जी की पोशाक, श्रृंगार नयनाभिराम होंगी।

इस दौरान भक्तों को अद्भुत छटा की अनुभूति होगी। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव को मनाने के लिए गर्भ गृह को सजाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मौके पर ठाकुरजी श्रीकुरुविंद’ पोशाक धारण करेंगे। इस पोशाक में रत्न व मोतियों से फूल की आकृति उकेरी गई हैं। 

*प्रारंभ हुए संस्कार:*

पं मनीष पाठक ने बताया कि विगत सात पीढ़ियों से परंपरानुसार जन्माष्टमी से पूर्व श्रावण शुक्ल एकादशी से विभिन्न संस्कार प्रारंभ हो जाते है।इस वर्ष जगदीश्वर धाम में हिंदू संवत्सर नाम के आधार पर पोशाक धारण कराई जाती हैं इस वर्ष 2082 सिद्धार्थी संवत्सर का नाम हैं इसलिए इस वर्ष कान्हा जी को अहमदाबाद से लाई गई नवीन पोशाक संवत्सर के अनुसार आकर्षक स्वरूप की धारण करेंगे।जिसका मूल उद्देश्य यह होता हैं कि संपूर्ण संवत्सर अर्थात वर्ष नगर समाज हित के लिए मंगल,समृद्ध, एवं वैभवशाली रहे। श्रीयुगल किशोर को पहनाई जाने वाली पोशाक के संस्कार अंतिम दौर में है।वस्त्र जुलाहा संस्कार,विश्वकर्मा संस्कार,मोर पंख संस्कार,सप्त तीर्थ जल संस्कार,आदि संपन्न कर दस दिग्पाल के संरक्षण में मंत्र जाप कर शुद्धिकरण किया जा रहा हैं।

जो जन्माष्टमी पर पूर्ण होगा।पोशाक आकर्षक लगे इसका विशेष ध्यान रखा गया है।पोशाक के साथ साथ ही गर्भगृह में लगने वाले।वस्त्र सहित अन्य समान का ध्यान विशेष रूप से रखा जाता हैं। *इस वर्ष पीली सरसों से होगा अभिषेक* पंडित डॉ दीपेश पाठक ने बताया कि जगदीश्वर धाम में प्रतिवर्ष अलग अलग साधनों से भगवान लड्डू गोपाल का महाभिषेक विभिन्न पदार्थों से किया जाता है इस वर्ष पीली सरसों से भगवान बाल गोपाल का अभिषेक किया जाएगा।यदि कोई भक्त नकारात्मकता,शत्रु की भयावहता,कार्य में रुकावटें,आर्थिक तंगी,बुरी शक्तियां आदि परेशानियों से पीड़ित हैं तो वह पीली सरसों से अभिषेक कर इन कठिनाइयों से मुक्ति प्राप्त कर सकता हैं।श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त कर आनंद एवं समृद्धि प्राप्ति के लिए पीली सरसों से अभिषेक किया जाएगा।साथ पंचमेवा,तुलसी दल,पुष्प फल आदि का भी अर्चन होगा।रात्रि को मध्यान्ह समय 12 बजे महाआरती के उपरांत अभिमंत्रित सरसों भक्तों को वितरित की जाएगी ।

*ऐसे की जाएगी जन्माष्टमी की पूजा* 

जन्माष्टमी के अवसर 16 अगस्त की प्रातः कालीन शंख से श्रीकृष्ण की आरती की जाएगी. सुबह 8 बजे भगवान श्रीकृष्ण का पीली सरसों पंचामृत व पंचमेवा से अभिषेक किया जाएगा. इसके बाद 10 बजे के करीब पुष्पांजलि और अमृतभोग का कार्यक्रम होगा. मध्यकाल उपरांत पुनः श्रृंगार संध्या 07 बजे महिलाओं द्वारा दिव्य भजनों का गायन रात्री 08 बजे श्रीतुलसी मानस मंडल के द्वारा भजनों के माध्यम से बालगोपाल को वंदन किया जायेगा रात्री 12 बजे महाआरती व श्रीकृष्ण की जन्म पत्रिका का वाचन होगा।

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