संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन हुआ भक्ति रस का अद्भुत संगम, आज निकलेगी भव्य शोभायात्रा
रिपोर्ट राजीव गुप्ता आष्टा जिला सीहोर मप्र

आष्टा। श्रद्धा से किया गया हर कार्य ही श्राद्ध है, और श्रद्धावान व्यक्ति को ही ज्ञान की प्राप्ति होती है। “श्रद्धावान लभते ज्ञानम्” शास्त्र का यही संदेश है। सनंसय आत्मा का नाश होता है, इसलिए माता-पिता, गुरु, भगवान और शास्त्रों में श्रद्धा रखना अनिवार्य है।प्रभात फेरी एवं खत्री समाज महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन मालवा माटी के सुप्रसिद्ध कथा वाचक संत श्री मिट्ठू पुरा सरकार ने अपनी मधुर वाणी से श्रोताओं को रसस्नान कराया।

उन्होंने कहा कि जीवन में परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है। तुलसी बाबा कहते हैं – परहित सरिस धरम नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।संत श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जटायु ने प्राण गवां दिए, पर धर्म नहीं छोड़ा और भगवान की गोदी प्राप्त की। वहीं पितामह भीष्म को संकट काल में द्रौपदी की सहायता न करने के कारण बाणों की शैया पर लेटना पड़ा। गरीब और असहाय की पीड़ा को समझना ही सच्चा वैष्णव धर्म है।

रहीम जी भी लिखते हैं – गरीब को मत सताइए, वाह की मोटी हाय। मरे पशु के चर्म से, लोह भस्म हो जाय।कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। रुक्मणी जी के विदाई पर गाए गए भजनों से श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।

मधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमकर नाच उठे और कथा का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।आज कथा के समापन अवसर पर नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस पावन अवसर पर महेंद्र सिंह इंजीनियर, श्रीमती गुलाबई ठाकुर, श्रीमती मधु गौतम, श्रीमती ललिता ठाकुर, नरेंद्र सिंह भाटी, अकबर सिद्दीकी, अशोक गौतम, बबलू खत्री, लोकेंद्र पिपलोदिया, अशोक खत्री, सवाई सिंह ठाकुर, रमेश खत्री, सागर खत्री, कैलाश महाराज, गणेश नामदेव, वेद प्रकाश पिपलोदिया, दिनेश डोंगरे, जुगल पटेल, अशोक डोंगरे, चंदू खत्री, सोनू निगम, राधेश्याम दाऊ सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
